नैतिक शिक्षा नैतिक शिक्षा का आशय व्यक्ति के उन गुणों के विकास से है, जो उसके व्यक्तित्व को प्रतिभाशाली बनाकर उसे समाज का एक उपयोगी अंग बनाते है और दूसरी ओर एक ऐसी मानसिक स्थिति के निर्माण से है, जिसमें वह अपने से अधिक दूसरों के हित में अपना कल्याण समझता है। अर्थात् यह वह शिक्षा है, जो मनुष्य को मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करती है तथा सच्चे अर्थों में मानव बनाकर उसके व्यक्तित्व को ऊँचा उठाने वाले सद्गुणों का विकास करती है । इ सका क्षेत्र तत्वज्ञान से लेकर लक्ष्य प्राप्ति तक विस्तृत है । सर्वप्रथम तो यह व्यक्ति को इस बात का ज्ञान कराती है कि उसका स्वयं अपने प्रति, कुटुम्ब के प्रति, समाज और राष्ट्र के प्रति क्या कर्तव्य है । तत्पश्चात् उसके हृदय में इन संस्थाओं के प्रति अनुराग उत्पन्न करके उसे कर्तव्य-पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करती है । उसमें ऐसे संस्कार उत्पन्न करती है कि अनेक कठिनाइयाँ आने पर भी मनुष्य कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता । वास्तव में इसका क्षेत्र स्वामी विवेकानन्द के इन शब्दों में समाया हुआ है कि ‘जागो, उठो और तब त...